बनारस ! एक अधूरी यात्रा, पर एक मुकम्मल अहसास!

"Golden sunset over the ghats of Banaras, featuring traditional wooden boats along the Ganges river and people walking on the historic stone steps."

 "बनारस"
एक अधूरी यात्रा, पर एक मुकम्मल अहसास!
क्सर लोग कहते हैं कि बनारस एक शहर नहीं, एक 'अहसास' है। मैंने भी बहुत सुन रखा था। मेरे घर से दूर तो नहीं था, पर बनारस जाने का संयोग कभी बन ही न सका। कहते हैं न, जब बनारस बुलाता है, तभी आप जा पाते हैं।

कुछ पारिवारिक कार्यक्रमों के चलते मुझे उस नगरी में जाने का मौका मिला। मेरा जाना बहुत जल्दबाजी भरा था। पूरा दिन निकल गया, पर सच कहूँ तो उस भागदौड़ में बनारस और मेरे बीच वो 'रूबरू' वाली मुलाकात नहीं हो पाई जिसे मैं वर्षों से ढूंढ रहा था।

लेकिन, उन कुछ घंटों में जो मैंने देखा, वह एक खूबसूरत तस्वीर की तरह मेरी आँखों में बस गया। वह शांति, वह गंगा की लहरों का शोर, और वह बनारस का अपना अलग संसार... वह सब आज भी मेरे अंदर थमा हुआ है।

मैंने उन्हीं पलों को शब्दों में पिरोने की कोशिश की है। यह कविता उन सभी के लिए है जिनके अंदर कहीं न कहीं बनारस ज़िंदा है, और जो इस भागती हुई दुनिया से दूर, एक बार फिर बनारस की उन गलियों में खुद को खोजना चाहते हैं।

जब आप इसे पढ़ें, तो बस शब्दों को मत पढ़िएगा—कोशिश कीजिएगा कि आप खुद को उस घाट पर, उन गलियों के बीच महसूस कर सकें।

"हाय रे बनारस"

हाय रे बनारस!
क्या खूब हो बनारस।
तुम मन हो, तुम मीत हो,
तुम जीवन का संगीत हो।

चाहूं जो बिछड़ना तो,
बिछड़ भी ना पाऊं मैं।

वो गंगा की धारा,
वो मंदिर की घंटी,
वो घाटों के किस्से,
वो नावों की मद्धम रवानी।

वो शब्दों का रस,
वो बातों का अल्हड़पन,
वो ममता सा आंचल,
वो हवाओं की खुशबू

हाय रे बनारस!
क्या खूब हो बनारस!

वो गलियों की रौनक,
वो लोगों का जमघट,
वो संझा की आरती,
वो घाटों की थाती

मैं बिछड़ा नहीं, तुम्हें समेटा है खुद में,
हर फूल चुनकर सजाया है दिल में।
यादों में तुमको लिए जा रहा हूँ,
बनारस! तुम्हें ही जिए जा रहा हूँ।

हाय रे बनारस!
क्या खूब हो बनारस!

Prathvi🦂


बनारस के वो पल, मेरी नज़र से:
मैंने बनारस के उन पलों को अपने कैमरे में भी कैद किया है। उस अहसास को आप यहाँ देख सकते हैं:
1. YouTube वीडियो (शॉर्ट्स):

2. Instagram Reel:

"चलते-चलते…”
“बनारस” केवल एक स्थान नहीं है, यह एक ठहराव है जो हम सबके भीतर कहीं छिपा है। क्या आपकी भी बनारस से जुड़ी कोई ऐसी ही अधूरी मुलाकात या कोई खास याद है जो आज भी आपकी यादों में ताज़ा है? मुझे कमेंट्स में ज़रूर बताइएगा।
अगर मेरे इन शब्दों और अहसासों ने आपके दिल को थोड़ा भी छुआ है, तो मुझे यकीन है कि मेरा अगला ब्लॉग भी आपको वही सुकून और अपनापन देगा।
शायद हम सब अपनी अगली यात्रा में बनारस से फिर से रूबरू हो सकें।
हाय रे बनारस, क्या खूब हो तुम!🙏🥀




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